मूलमंत्र
 
 
  णमो अरिहंताणं
णमों सिध्दाणं
णमो आइरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोएसव्वसाहूणं
 

अरिहंतो को नमस्कार हो ।
सिध्दों को नमस्कार हो ।
आचार्यों को नमस्कार हो ।
उपाध्यायों को नमस्कार हो ।
लोक के सर्व साधुओं को नमस्कार है ।

 
नवकारमंत्र
 
यह जैनधर्म का मूलमंत्र है । इस मंत्र से 84 लाख मंत्रों की उत्पत्ति हुई है । इस मंत्र में 5 पद, 35 अक्षर और 58 मात्राएं हैं । इस मत्र को मूलमंत्र के अलावा नवकारमंत्र, पंचनमस्कार मंत्र, अपराजित मंत्र, अनादि मंत्र, णमोकार मंत्र, मंत्रराज भी कहते हैं । इस मंत्र के जाप स्मरण से सभी प्रकार के दुख-क्लेश दूर हो जाते हैं एवंसुख शांति की अनुभूति होती है ।
 
मंलग पाठ
 

चत्तारि मंगल - अरहंता मंगलं, सिध्दा मंगलं,
साहू मंगलं, केवलिपण्णत्तो धम्मो मंगल ॥

अर्थ लोक में चार मंगल हैं (1) अरिहन्त मंगल है (2) सिध्द मंगल है
(3) साधु मंगल है । (4) केवली प्रणीत जिन धर्म मंगल है ।

चत्तारिलोगुत्तमा-अरिहंता लोगुत्तमा, सिध्दा लोगुत्तमा,
साहू लोगुत्तमा, केवलिपण्णत्तो धम्मों लोगुत्तमा ।

अर्थ लोक में चार उत्तम है (2) सिध्द उत्तम है । (3) साधु उत्तम है
(4) केवली प्रणीत जिनधर्म उत्तम है ।

चत्तारिशरणं पव्वज्जमि-अरिहंत शरणं पव्वज्जामि, सिध्द शरणं
पव्वज्जामि, साहू शरणं पव्वज्जामि, केवलिपण्णत्तो धम्मंशरणं पव्वज्जामि ।

अर्थ लोक में चारशरण हैं ।
1- अरिहन्तों की शरण है ।
2- सिध्दों की शरण है ।
3- साधुओं की शरण है ।
4- केवलि प्रणीत जिनधर्म की शरण है ।
 
परमेष्ठि परिचय
 

णमो अरिहंताणं, णमो सिध्दाणं
णमो आइरियाणं, णमो उवज्झायाणं
णमो लोएसव्वसाहूणं

प्रश्न परमेष्ठि किसे कहते हैं ? और कितने होते है?
जो परम पद में स्थित हैं उन्हें परमेष्ठि कहते हैं ।
परमेष्ठि पांच होते हैं
(1) अरिहन्त (2) सिध्द (3) आचार्य (4) उपाध्याय (5) साधु ।

प्रश्न अरिहन्त परमेष्ठि किसे कहते हैं ?
चारकर्मोकानाश करके जिन्होनेंकेवल ज्ञान प्राप्त किया है तथा जो 18 दोषों से रहित हैं उन्हें अरिहन्त परमेष्ठि कहते हैं । अरिहंत भगवान वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी होते हैं ।

प्रश्न सिध्द परमेष्ठि किसे कहते है ?
जिन्होंने 8 कर्मो का नाश कर दिया है और जिन्होंने हमेशा-हमेशा के लिए जन्म मरण से छुटकारा पा लिया है तथा जो मित्य, निरंजन, निराकार, है उन्हें सिध्द परमेष्ठि कहते है ।

प्रश्न आचार्य परमेष्ठि किसे कहते है ?
जो मुनि संघ के नायक होते हैं और शिष्यों को शिक्षा-दिक्षा देते हैं तथा अपराध होने पर प्रायश्चित देते हैं उन्हें आचार्य परमेष्ठि कहते हैं ।

प्रश्न उपाध्याय परमेष्ठि किसे कहते है ?
जो संघ में रहकर पढ़ते हैं तथा संघस्थ अन्य मुनिगणों को पढ़ाते हैं, विशेष ज्ञानवान होते हैं, उन्हें उपाध्याय परमेष्ठि कहते है ।

प्रश्न साधु परमेष्ठि किसे कहते है ?
जो पंचेन्द्रिय के विषय - वासनाओं , और आरंभ तथा पाप क्रियाओं से दूर हैं, परिग्रह से रहित, नग्न दिगम्बर हैं । पिच्छी-कमंडलु से युक्त तथा ज्ञान ध्यान में अनुरक्त हैं उन्हें साधु परमेष्ठि कहते है ।

प्रश्न णमोकार मंत्र मेूं कितने पद, कितने अक्षर, कितनी मात्राएं हैं ?
णमोकार मंत्र में 5 पद, 35 अक्षर, और 58 मात्राएं है ।

प्रश्न किस परमेष्ठि के कितने मूलगुण होते हैं ?
अरिहंतो के 46 मूलगुण होते हैं ।
सिध्दों के 8 मूलगुण होते है ।
आचार्यों के 36 मूलगुण होते है।
उपाध्यायों के 25 मूलगुण होते है ।
साधुओं के 28 मूलगुण होते है ।

प्रश्न णमोकार मंत्र के अन्य नाम कौन-से है ?
(1) नवकार मंत्र (2) पंच नमस्कार मंत्र (3) महामंत्र (4) अपराजित मंत्र (5) अनादि मंत्र (6) मंगल मंत्र (7) मूल मंत्र (8) मंत्र राज

प्रश्न णमोकार मंत्र को कितनी तरह से पढ़ा जा सकता है ?
णमोकार मंत्र को 18432, तरह से पढ़ा जा सकता है ।